Wednesday, June 13, 2007

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा, बेटा हमारा ऐसा काम करेगा .....

आज हमने ये गाना सुना। बहुत दिनों के बाद.... मुझे अभी भी याद है १९८८ के वो दिन, जब हमने बस चलना सीखा था, अकेले घूमना सीखा था। जब चांद बड़ा हुआ करता था और सूरज भी कम गरम होता था, जब हवाएं तेज चलती थी और हम खजूर के पेड़ो से कच्चे कच्चे ही खा लिया करते थे, और पापा हम लोगो के लिए अंगूर खरीद दिया करते थे।

बचपन के दिन भी क्या दिन थे उड़ाते फिरते तितली बन के, बचपन...

पापा कहते थे कि बेटा ऐसा बनेगा, वैसा बनेगा। हम लोग वो मासूम फिल्म का "लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा " गाते थे, और पापा ये गाना सीखाते थे, "तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो, तुम्ही हो बंधु, सखा तुम्ही हो" ...

और हम तो पहले ये गाना गाते थे, "जिन्दगी एक सफ़र है सुहाना..... " लेकिन फिर आयी फिल्म "क़यामत से क़यामत तक" .......

फिर शुरू हुआ... " पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा........"
मेरा पहला प्यार... "जूही चावला" कित्ती सुन्दर थी और कितनी प्यारी... पर हम तो बहुत छोटे थे.... शायद इसीलिये जूही हमें नही मिली...

उदित नारायण.... भई उस समय के बाद हम तो कुमार सानू के फैन थे... बाद मे हमें जब ज्ञान प्राप्त हुआ तो पता चला कि उदित नारायण साहेब सच मे अच्छा गाते थे , जिसके खिलाफ हमने अपने बड़े भाई साहेब से काफी झगड़ा किया था।

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा, बेटा हमारा ऐसा काम करेगा...... मेरा तो सपना है एक चेहरा, देखे जो उसको झूमे बहार, गालो पे खिलती कलियों का मौसम आँखों मे जादू होठों पे प्यार.....

लेकिन....

क्या से क्या हो गया, बेवफा तेरे प्यार में.... चाहा क्या क्या मिला बेवफा तेरे प्यार में.....

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